• मुठभेड़ के दौरान सबसे ज्यादा मेरठ जोन में मारे गए 59 बदमाश
  • वहीं सबसे अधिक 3792 बदमाशों को मेरठ जोन में ही किया गया गिरफ्तार
  • गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट में भी 6 बदमाश हुए ढ़ेर और 717 की हुई गिरफ्तारी

लखनऊ। यूपी में योगी सरकार के आने के साथ से ही पुलिस की गोली जमकर बोल रही है। इतना ही नहीं सरकार के करीब 3 साल के कार्यकाल में पुलिस की गोली ने 122 बदमाशों को भी ढ़ेर किया है। हालांकि इन मुठभेड़ों के दौरान यूपी पुलिस के 13 जवान भी वीरगति को प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकार में आने के साथ ही यह संदेश दिया था कि बदमाश प्रदेश छोड़ दें। उनकी सरकार में कानून व्यवस्था को लेकर ना तो कोई समझौता किया जाएगा और ना ही वो किसी के दबाव में आने वाले हैं।

पुलिस विभाग में दर्ज आंकड़ों के अनुसार 20 मार्च 2017 से लेकर 10 जुलाई 2020 तक पुलिस की बदमाशों के साथ 6126 मुठभेड़ की घटनाएं हुईं हैं। इन मुठभेड़ की घटनाओं में 122 बदमाश पुलिस की गोली से मारे जा चुके हैं। वहीं 2293 बदमाश गोली लगने से घायल हुए हैं। जबकि 13361 बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं मुठभेड़ की इन घटनाओं में 13 पुलिसकर्मी शहीद हुए तो 894 घायल भी हुए। हाल ही में कानपुर नगर के चौबपुर थाना क्षेत्र स्थित बिकरू गांव में दबिश के दौरान अपराधियों की गोलीबारी में आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र में हुई इस घटना से पूर्व केवल 5 पुलिसकर्मी ही शहीद हुए थे। इसी घटना के बाद मुख्य अभियुक्त विकास दुबे समेत छह अपराधी भी पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए।

जोनवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा 59 बदमाश मेरठ जोन में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारे गए हैं। वहीं 11-11 बदमश आगरा व वाराणसी जोन में पुलिस एनकाउंटर में ढ़ेर हुए। सबसे ज्यादा 3792 बदमाशों की गिरफ्तारी भी मुठभेड़ के बाद मेरठ जोन में ही की गईं। इसके बाद सबसे ज्यादा 3693 बदमाश आगरा जोन में गिरफ्तार किए गए। बरेली जोन में सात अभियुक्त मारे गए तो 1940 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए। लखनऊ कमिश्नरेट में दो अभियुक्त मारे गए तो 65 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए, जबकि लखनऊ जोन में 9 अभियुक्त मारे गए तो 580 गिरफ्तार किए गए। इसी तरह गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट में 6 अभियुक्त मारे गए तो 717 अभियुक्त गिरफ्तार किए गए।