राजस्थान में मुख्यमंत्री अशेक गहलोत और कांग्रेस पार्टी आलाकमान की मुश्किलें उपमुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट व उनके समर्थकों ने बढ़ा दी हैं। जिसके बाद से रविवार को जयपुर से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस की गतिविधियां तेज हो गई हैं। वहीं सूत्रों की माने तो सचिन पायल अपने खास मित्र एवं भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मिलकर राजस्थान में कोई बड़ा गुल खिला सकते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ पायलट समर्थन विधायक अपना नया दल बनाने की भी सलाह दे रहें हैं।

बता दें कि करीब पौने दो साल पूर्व राजस्थान की सत्ता में आई कांग्रेस 23 दिन पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान पूरी तरह सुरक्षित दिखाई पड़ रही थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस पार्टी आलाकमान भी आश्वस्त थे कि उनकी सरकार के पास पूरा बहुमत है। जिससे पांच साल तक उनकी सरकार को कोई मुश्किल होने वाली नहीं है। लेकिन उसके बाद राजस्थान में गहलोत सरकार अब बुरे संकट में नजर आ रही है।

जिसे लेकर रविवार को दिनभर जयपुर से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस नेताओं के फोन घनघनाते रहे और गतिविधियां तेज रहीं। इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिन में कई बार राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता अहमद पटेल व राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे से बात की। राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडेय ने गहलोत से बात होने के बाद सचिन पायलट से भी संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। बता दें कि इससे पहले पायलट ने शनिवार देर रात दिल्ली में अहमद पटेल से मुलाकात की थी। पायलट ने अहमद पटेल से मुलाकात के बाद रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी को भी साफ संदेश पहुंचा दिया कि अशोक गहलोत उन्हें साइडलाइन करने में जुटे हैं, जिसे वो किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे।

वहीं सचिन पायलट के करीबी एवं उनके गृह जनपद के एक विश्वस्त कांग्रेस नेता ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि पायल की कुछ दिनों पूर्व ज्योतिरादित्य सिंधिया से फोन पर बात हुई थी। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री व हरियाणा के भाजपा नेता चौधरी विरेंद्र सिंह सहित कई नेता चाहते हैं कि पायलट बीजेपी के साथ आ जाएं। जिसे लेकर बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने भी पायलट को ऑफर दिया है। लेकिन पायल के अधिकांश समर्थक विधायक उन्हें सलाह दे रहें है कि वो बीजेपी में शामिल होने के बजाय अपना अलग दल बनाए। जिसके बाद बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई जा सकती है। वहीं अलग दल बनाने की अधिक संभावनाएं जताई जा रही हैं। क्योंकि माना जा रहा है कि सचिन पायलट का राजस्थान से लेकर दिल्ली एनसीआर की गुर्जर बैल्ट में अच्छा खासा असर है। जिसके चलते सचिन पायलट के गृह जनपद गौतमबुद्ध नगर से लेकर गाजियाबाद, फरीदाबाद के कांग्रेसी नेता बड़ी संख्या में उनके नए दल के साथ जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि गृह जनपद होने के नाते गौतमबुद्ध नगर से बड़ी संख्या में नेताओं को जोड़ा जा रहा है।

ये है राजस्थान विधानसभा की स्थिती

राज्य विधानसभा में दलीय स्थिति को देखें तो कांग्रेस के पास 107 विधायकों का समर्थन हैं। इसके अलावा सरकार को 13 निर्दलीय और एक राष्ट्रीय लोकदल के विधायक का भी समर्थन है। यानी कांग्रेस के पास 121 विधायकों का समर्थन है। बीजेपी के पास 72 विधायक हैं। राष्ट्रीय लोकदल के तीन, माकपा व बीटीपी के दो-दो विधायक हैं। अगर मध्य प्रदेश की तर्ज पर कांग्रेस के कुछ विधायक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे देते हैं और निर्दलीय भी कांग्रेस के बजाय बीजेपी का समर्थन कर दें तो गहलोत सरकार अल्पमत में आ सकती है। पायलट के समर्थक 20 विधायक हैं। इनमें 13 एनसीआर के होटल में हैं। तीन निर्दलीय भी पायलट के साथ हैं। अगर 23 विधायक इस्तीफा दे देते हैं तो सदन में विधायकों की कुल संख्या 177 रह जाएगी और बहुमत साबित करने का आंकड़ा 101 से कम होकर 90 रह जाएगा। बीजेपी के पास इस समय 72 विधायक हैं। अगर उसे 13 निर्दलीयों का भी समर्थन मिल जाए तो उसके समर्थक विधायकों की संख्या 85 तक पहुंच जाती है।