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पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर का किया भंडाफोड़, पांच लोगों को किया गिरफ्तार

  • फोन कॉल पर लोगों को ऑफर देने के बहाने ओटीपी नंबर लेकर करते थे ठगी

  • गाजियाबाद से सेवा नगर से ऑपरेट किया जा रहा था फर्जी कॉल सेंटर

ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित भोले भाले लोगों को फोन पर ऑफर देने के बहाने ठगी का काला कारोबार करते थे। ठग ऑफर के बहाने लोगों से ओटीपी लेकर उनका क्रेडिट या डेबिट कार्ड हैक कर रुपए ओला मनी व पेटीएम में रुपए ट्रांसफर कर लेते थे। ठगी का यह काला कारोबार गाजियाबाद के सेवा नगर मौहल्ले से ऑपरेट किया जा रहा था। पुलिस ने 17 मोबाइल, 50 सिम कार्ड, एक लैपटॉप, एक सीपीयू समेत 11020 रुपए बरामद किए हैं।

    एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि वादी अभिषेक गौड़ के द्वारा बुधवार को सूरजपुर कोतवाली में आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया था। लेकिन इसी दौरान ठगों ने पीडित को एक बार फिर से फोन कर ओटीपी नहीं बताने पर जान से मारने की धमकी दी। ऐसे में पुलिस टीम ने योजना बनाकर ठग गैंग के मास्टरमाइंड अजय निवासी कविनगर गाजियाबाद को गुरूवार सुबह सूरजपुर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद अजय की निशानदेही पर गाजियाबाद सिहानी गेट थाना क्षेत्र के मौहल्ला सेवा नगर स्थित एक बिल्डिंग की तीसरी मंजिल से रोहित यादव, अभय सिंह, इरशाद और किशोर कुमार को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने मौके से 17 मोबाइल, 50 सिमकार्ड, एक लैपटॉप, एक सीपीयू समेत 11020 रूपए बरामद कर लिए। वहीं पीडित को धमकी दिए जाने में प्रयोग किए जाने वाला मोबाइल भी बरामद कर लिया।

  • कैसे करते थे ठगी

पुलिस ने बताया कि गैंग का मास्टर माइंड अजय है। वहीं अन्य सभी उसके सहयोगी हैं। ये सभी बीते आठ माह से भोले भाले लोगों को फोन कर ऑफर देने के बहाने ठगी का काला कारोबार करने में जुटे थे। पूछताछ के दौरान गैंग के मास्टर माइंड अजय ने बताया कि पहले वो लोगों को उनके क्रेडिट व डेबिट कार्ड पर रिवर्ट पाइंट व अन्य ऑफर की जानकारी देते थे। उसके बाद उसके खाते में रुपए भेजने के नाम पर उससे ओटीपी लेकर उसका अकाउंट हैक कर लेते थे। जिसके बाद पीडित के खाते से ठगी कर फर्जी बनाए गए ओला मनी व पेटीएम अकाउंटों में रुपए ट्रांसफर कर लेते थे।

  • मात्र दस से 15 हजार करते थे ट्रांसफर

गिरफ्तार आरोपितों ने पुलिस पूछताछ के दौरान बताया कि वो किसी भी व्यक्ति का अकाउंट हैक करने के बाद केवल 10 से 15 हजार रुपए ही ओला मनी या फिर पेटी एम में ट्रांसफर करते थे। यदि किसी पीडित के अकाउंट में उससे ज्यादा पैसे भी होते थे तो उन्हें वो नहीं निकालते थे। जिसकी वजह यह थी कि ठगी का शिकार होने वाले लोग ज्यादा बवाल ना करें। वहीं पुलिस भी छोटी मोटी रकम वाले पीडितों को अक्सर ज्यादा महत्व नहीं देती है।

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