ग्रेटर नोएडा। विके महामारी कोरोना के चलते पैदा हुए संकट के हालात से निपटने और नये सिरे से भविष्य के अवसर तलाशने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। लोगों में विशेषकर युवा पीढ़ी में निराशा का भाव पैदा न हो इसलिए विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से इनमें  नये ऊर्जा का संचार किया जा रहा है। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन स्टूडेंट इंडक्शन पखवाड़ा की शुरूआत की गई है। जिसके तहत नये वं पुराने छात्रों को कोविड महामारी के बाद आने वाली संभावनाएं एवं चुनौतियों से अवगत कराना है।

कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने गुरुवार को इस बात पर बल दिया कि आज के भारतीय युवा वि के लिए एक आशा की किरण हैं। वि की कुल युवा शक्ति का 20 प्रतिशत युवा भारतीय है और साथ ही वि की सबसे ज्यादा कृषि योग्य लगभग 16 करोड़ हेक्टेयर भूमि भारत की है। ऐसी परिस्थिति में पूरे वि का ध्यान भारत और भारत के युवाओं पर है। प्रो. शर्मा ने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली में कोई कमी नहीं है,क्योंकि यहीं से पढ़ने के बाद बहुत से ऐसे भारतीयों का उदाहरण दिया जिन्हें नोबल पुरस्कार तक मिला है। उन्होंने ऑप्टिकल फाइबर के जनक नरेंद्र सिंह कपानी, सीवी रमन, हरगोविंद खुराना आदि के उदाहरण दिए। आगरा विविद्यालय से पढ़े नरेंद्र सिंह कपानी का ऑप्टिकल फाइबर आज ग्लोबल विलिज में परिवर्तित हो चुका है। कुलपति ने कहा कि अगर छात्र गहन एवं एकाग्रचित होकर अध्ययन करें तो आने वाले समय में कोई भी चमत्कार कर सकते हैं और इसके लिए आने वाली चुनौतियों से सामना करने के लिए तैयार रहने की जरूरत है। कार्यक्रम के आयोजन का मकसद छात्रों को कोरोना महामारी के बाद आने वाली चुनौतियों का सामना करने और उन्हीं चुनौतियों से अपने लिए संभावना निकालने का मंत्र ढूंढने में छात्रों की मदद के लिए एक उपयुक्त मंच देने का प्रयास हैं। वहीं कई अन्य बुद्धिजीवियों ने उद्यमशीलता व कौशल के विकास पर जोर दिया। नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सफल भारतीय के कई उदाहरण दिए गए। सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों के समाधान के विकास, वित्त पोषण और कार्यान्वयन के लिए सामाजिक उद्यमिता पर भी जोर दिया गया। सामाजिक उद्यमशीलता ग्रामीण विकास को मजबूत कर सकती है। ऑनलाइन स्टूडेंट इंडक्शन कार्यक्रम में प्रो.एचपी बंसल, प्रो.वीके पाठक, रविंद्र बांगर, प्रो.संजीव शर्मा, डॉ.कुमार विास, प्रो.वीके कूथियल, प्रो.वंदना पांडेय, प्रो.महिमा बिड़ला, यशदेव सिंह, प्रो.नीलिमा गुप्ता आदि ने अपने विचार रखे।