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एक करोड़ की अफीम के साथ एक अन्तर्राज्यीय तस्कर व एक खरीददार गिरफ्तार

  • पुलिस ने आरोपितों से 63 किलो अफीम, 25 लाख कैश व डस्टर कार की बरामद

  • झारखंड से दिल्ली एनसीआर समेत हरियाणा और पंजाब तक फैला है तस्करों का जाल

ग्रेटर नोएडा के बीटा- 2 कोतवाली पुलिस ने अन्तर्राज्यीय अफीम तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने चेकिंग के दौरान यमुना एक्सप्रेस-वे के चूहडपुर अंडरपासा के पास से एक तस्कर समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जिनसे 1 करोड़ कीमत की 63 किलो अफीम व 25 लाख रुपए कैश और डस्टर कार बरामद की है। गिरोह का नेटवर्क झारखंड से दिल्ली एनसीआर समेत हरियाणा व पंजाब तक फैला हुआ है। गिरोह के दो लोग अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस टीम गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है। वहीं पुलिस महानिरीक्षक की ओर से पुलिस टीम को 50 हजार रुपए के पुरस्कार की घोषण की गई है।

एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि बीटा- 2 कोतवाली प्रभारी सुजीत उपाध्याय बुधवार शाम पुलिस टीम के साथ यमुना एक्सप्रेसवे के चूहड़पुर अंडरपास पर वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान जीरो प्वाइंट की ओर से आ रही एक डस्टर कार को रोककर चेकिंग की करीब 61 किलो ग्राम अफीम बरामद की गई। जिसपर पुलिस ने अफीम तस्करी के आरोप में कार में सवार अरुण भुइया निवासी झारखंड को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूछताछ के दौरान अरूण भुइया ने पुलिस को बताया कि वो यह अफीम सतीश नाम के खरीददार को डिलीवर करने जा रहा था।

  • डिलीवरी लेने आया था खरीददार

 जिसपर पुलिस ने उसकी निशानदेही पर खरीदार सतीश निवासी कुरुक्षेत्र हरियाणा को कासना नट मढैया गोल चक्कर से 2 किलो अफीम व 25 लाख रूपये कैश के साथ धर दबोचा। एसएसपी ने बताया कि तस्कर अरुण भुइया से पूछताछ में पता चला है कि वह अपने साथी दिनेश यादव व विशेर यादव के  साथ मिलकर झारखंड से अफीम लाकर दिल्ली एनसीआर में सतीश और कुछ अन्य एजेंटों को बेचता था। पुलिस के हत्थे चढ़ा खरीदार व गिरोह से जुड़े अन्य तस्कर हरियाणा व पंजाब में अन्य डीलरों को बेच देते हैं। गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों से पूछताछ में मिली जानकारी  के आधार पर पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य तस्करों व खदीदारों की तलाश कर रही है।

  • कैसे करते थे तस्करी

गिरफ्तार आरोपितों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि उन्होंने डस्टर कार में स्टपनी के नीचे अलग से बॉक्स बनाया हुआ है। जिसमें तस्करी की जाने वाली अफीम की खेफ को रखकर नीचे से लोहे की प्लेट लगा दिया करते थे। जिसके ऊपर गाड़ी की स्टेपनी को लगा दिया था। जिसके बाद किसी को भी गाड़ी में रखी अफीम की भनक तक नहीं लगती थी। लेकिन यहां पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी। ऐसे में पुलिस ने चेकिंग के दौरान गाड़ी में सीट हटाकर देखा तो कुछ वैल्डिंग के निशान थे। जिनके आधार पर गाड़ी के निचले हिस्से में लगी स्टेपनी को निकालकर जांच की गई तो लोहे की प्लेट से दबी अफीम को निकाला जा सका।

 

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