आगरा पुलिस ने हाल में बीते शुक्रवार को तीन नवजात बच्चों को नेपाल बेचने जा रहीं दो महिलाओं समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। जिसके बाद आरोपितों से हो रही पूछताछ के दौरान चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस को जानकारी मिली है कि बच्चों के सौदागरों का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले गिरोह के सदस्य करीब 30 महिलाओं की डिलीवरी नेपाल में करा चुके हैं। कोरोना संकट काल के चलते पहली बार लॉकडाउन में गिरोह के सदस्यों को महिलाओं की डिलीवरी फरीदाबाद के दो अस्पतालों में करानी पड़ी है। अभी तक पुलिस को गैंग के 25 सदस्यों की जानकारी मिल चुकी है।

आगरा में लखनऊ एक्सप्रेस वे टोल प्लाजा पर पुलिस ने दो गाड़ियों को पकड़ा था। गाड़ियों में दो चालक, दो महिलाएं, एक पुरुष और तीन नवजात बच्चे मिले थे। पुलिस को खबर मिली थी कि मामला मानव तस्करी से जुड़ा है। लेकिन पकड़े गए लोगों से अलग अलग गहनता से पूछताछ के बाद जानकारी मिली कि गैंग निसंतान दंपति को बच्चे बेचता था। जिसके लिए गैंग के सदस्य पहले ऐसी आर्थिक रूप से कमजोर व जरूरतमंद महिलाओं को अपने जाल में फंसाते थे। जोकि अपने पति से अलग रहती हैं। उसके बाद उन्हें किराए पर कोख (सेरोगेसी) देने के लिए तैयार करते थे। आरोपितों से बरामद की गईं तीनों नवजात भी ऐसे ही पैदा हुई थीं।

एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि पूछताछ में चालकों ने अपने नाम अमित (बदरपुर, दिल्ली), राहुल (हर्ष विहार, पूर्वोत्तर दिल्ली) बताए। उनके साथ गाड़ी में धीरज नगर सेक्टर 31 फरीदाबाद निवासी प्रदीप, रूबी व नीलम सवार थे। तलाशी में आरोपियों से पास से देवी हॉस्पिटल व गेटवैल हॉस्पिटल, सेक्टर 19 फरीदाबाद (हरियाणा) के कागजात मिले। ये कागजात नवजात बच्चों के जन्म से संबंधित हैं। बच्चों का जन्म वहां हुआ या फर्जी कागजात तैयार कराए गए इसकी भी जांच होगी।

नेपाल में बैठी संचालिका करती है डिमांड

एसपी पूर्वी प्रमोद कुमार ने बताया कि आरोपी राहुल गैंग में एजेंट का कार्य करता है। आरोपी ने पूछाताछ में पुलिस को बताया है कि वह गैंग में दो साल से है। नेपाल की संचालिका अस्मिता बच्चों की डिमांड करती है। डिलीवरी के बाद बच्चों को नेपाल में एक महिला के सुपुर्द किया जाना था। वह नेपाल में हॉस्पिटल चलाती है। नेपाल में लड़कियों की मांग अधिक है।

आठ लाख रुपए में होता था बच्ची का सौदा

एजेंट राहुल ने जांच के दौरान पुलिस को बताया है कि आठ लाख रुपये में एक बच्चे का सौदा तय होता था। फरीदाबाद और आसपास नीलम जरूरतमंद महिलाओं की तलाश करती है। उसके अलावा गैंग में और भी 20-25 सदस्य हैं। ये महिलाओं को नेपाल ले जाकर सेरोगेसी का प्रोसेस कराते थे। नीलम गर्भवती महिलाओं की देखभाल करती थी। समय पूरा होने पर उन्हें प्रसव के लिए नेपाल ले जाया जाता था। प्रसव होने के बाद महिलाएं वापस आती थीं। दो साल में 30 महिलाएं नेपाल जा चुकी हैं। मगर, इस बार लॉकडाउन में महिलाओं को नहीं ले जा सके थे। इस कारण फरीदाबाद के हास्पिटलों में प्रसव कराया गया है। गैंग में 25 से अधिक सदस्य हैं। पुलिस अब गैंग के सदस्यों के बारे में और जानकारी कर रही है।

नीलम है गैंग की सरगना

पूछताछ में आरोपी रूबी ने बताया कि कि नीलम गैंग की सरगना है। वही लोगों को एजेंट बनाती है। ऐसी महिलाओं को अपने जाल में फंसाती है जिनकी आर्थिक स्थिति खराब है। वे अपने पतियों से अलग रहती हैं। नीलम ऐसी महिलाओं को गर्भधारण करके पैसा कमाने का लालच देती है। महिलाएं भी इसके लिए तैयार हो जाती हैं। एक डॉक्टर के माध्यम से महिला को गर्भधारण कराया जाता है। शुक्राणु उस पुरुष के लिए जाते हैं जो बच्चे की मांग करते हैं। शादी के बाद उसकी पत्नी के कोई बच्चा नहीं हो रहा होता है।

फरीदाबाद में रखी जाती हैं गर्भवती महिलाएं

पुलिस के मुताबिक तीन नवजात बच्चों में दो जुड़वा लड़कियां हैं। इन बच्चियों को बिहार की एक महिला ने जन्म दिया था। महिला फरीदाबाद में रहती है। उसे तीन किश्तों में साढ़े तीन लाख रुपये मिले थे। एक बच्चा आठ लाख रुपये में बिकता है। पूरा खर्चा काटने के बाद नीलम को लगभग तीन लाख रुपये बच जाते हैं। गर्भधारण से लेकर महिला की देखभाल करना और उसकी डिलीवरी कराने की जिम्मेदारी नीलम की रहती है। वह महिला को गर्भधारण करते ही पहली किश्त देती है। दूसरी किश्त डिलीवरी से सात दिन पहले और तीसरी किश्त बच्चा सुपुर्द करते समय देती है।